शुक्रवार 28 अगस्त 2026 - 04:48
बेकार की उम्मीदों से बचें

अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में बेकार और झूठी उम्मीदों से बचने तथा ऐसे भविष्य पर भरोसा करने से मना किया है, जिसके बारे में हमें कोई निश्चित जानकारी नहीं है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत “ग़ेरर उल हिकम” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

امام علی علیه‌السلام:

اتَّقُوا بَاطِلَ الْأَمَلِ، فَرُبَّ مُسْتَقْبِلِ یَوْمٍ لَیْسَ بِمُسْتَدْبِرِهِ، وَمَغْبُوطٍ فِی أَوَّلِ لَیْلِهِ قَامَتْ بَوَاکِیهِ فِی آخِرِهِ.

इमाम अली (अ) ने फ़रमाया:

“बेकार और झूठी उम्मीदों से बचो, क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति अगले दिन की उम्मीद करता है, लेकिन उस दिन तक पहुँच नहीं पाता। और अक्सर ऐसा होता है कि रात की शुरुआत में लोग किसी व्यक्ति की खुशहाल स्थिति से ईर्ष्या करते हैं, लेकिन रात के अंत तक उसके लिए रोने वाले बन जाते हैं।”

ग़ेरर उल हिकम, हदीस 2572

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha